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भारत-चीन विवाद – चीन को आर्थिक मोर्चे पर घेरने की तैयारी

भारत-चीन विवाद, चीन के 59 ऐप्स पर पाबंदी, लोकल को वोकल, चीन की अर्थव्यस्था, गलवान घाटी

चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों में घुसपैठ की कोशिशें लगातार होती रही है, चाहे वह सिक्किम से लगी सीमा हो, अरुणाचल की सीमा हो या फिर लद्दाख की सीमा। प्रत्येक घुसपैठ की कोशिशों का भारतीय जवानों ने हमेशा मुंहतोड़ जवाब दिया है, इसी क्रम में लद्दाख सीमा के पास गलवान घाटी में 15 जून की रात भारतीय सैनिकों की चीनी सैनिकों से झड़प हो गई, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए, भारतीय सैनिकों ने भी अद्भुत वीरता का परिचय देते हुए 40 से भी अधिक चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। लेकिन इस अप्रत्याशित घटना ने तमाम भारतीयों के मन में चीन के प्रति असीम क्रोध भर दिया है।

कोरोना वायरस को फैलने के लिए चीन को जिम्मेवार मानते हुए, तमाम लोग पहले से ही चीन से नाराज़ थे और अब इस घटना ने आग में घी डालने का काम किया है। लोगों ने चीनी सामानों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। जगह जगह, धरना प्रदर्शन और चीनी सामानों का पुतला जलाया जा रहा है। लोगों के आक्रोश को देखते हुए, अब भारत सरकार ने भी चीन को सबक सिखाने का मन बना लिया है और चीन को आर्थिक मोर्चे पर पटखनी देना शुरू कर दिया है।


आर्थिक मोर्चे पर पटखनी देने की तैयारी

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चीन की अर्थव्यस्था का एक चौथाई हिस्सा भारत, अमेरिका और यूरोपीय देशों से व्यापार द्वारा आता है, भारत, जापान और अमेरिका से तो चीन की तनातनी चल ही रही है, यूरोपीय देशों से भी उसके सम्बन्ध कुछ अच्छे नहीं हैं, ख़ासकर कोरोना से सम्बंधित जानकारी छिपाने के कारण। ऎसी स्थिति में, अगर इन देशों द्वारा चीन के बहिष्कार का निर्णय लिया जाता है तो यह चीन पर एक बहुत बड़ी चोट होगी और चीनी अर्थव्यस्था पूरी तरह से चरमरा जायेगी।

भारत ने तो चीनी कंपनियों को विभिन्न सरकारी ठेकों से बाहर निकालना शुरू भी कर दिया है। इसी क्रम में, भारतीय संचार निगम, रेलवे, सड़क निर्माण कार्य आदि के विभिन्न ठेकों से चीनी कंपनियों को बाहर कर दिया गया है, चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है, इतना ही नहीं अब चीनी कंपनी के ज्वाइंट वेंचर वाली कंपनियां भी सरकारी टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाएंगी। अब प्राइवेट कंपनियों ने भी चीन का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है, प्रमुख साईकिल निर्माता कंपनी, हीरो ने चीनी कम्पनी के साथ किया गया 900 करोड़ का अपना कराड़ तोड़ने का फैसला किया है, उम्मीद है अन्य कंपनिया भी जल्द ही फैसला लेगी।


टिक टॉक सहित चीन के 59 ऐप्स पर पाबंदी

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अब सरकार ने चीन को एक और झटका देने का फैसला किया है और चीनी ऐप टिक टॉक सहित 59 चीनी ऐप्स पर पाबंदी लगा दिया गया है। विभिन्न चीनी ऐप पर जासूसी करने का आरोप काफी समय से लगाया जाता रहा है और उनपर प्रतिबंध लगाने की मांग जोर पकड़ रही थी। भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा भी देश की सुरक्षा के मद्देनजर इन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही थी।

चीनी ऐप टिक टॉक भारत में काफी लोकप्रिय था, और कम समय में ही भारत में इसके 8 करोड़ से भी ज्यादा यूजर्स बन गए थे। भारतीय यूजर्स की बदौलत ही, टिक टॉक विश्व के 200 प्रमुख एप्स की सूचि में शामिल हो गया था और भारत में काफी लोकप्रिय अमरीकी एप “यूट्यूब” को तगड़ी टक्कर दे रहा था, लेकिन भारत में टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही यह विश्व के प्रमुख एप्स की सूचि से बाहर हो गया है।

जानिए भारत में टिक टॉक क्यों बंद हो गया


“लोकल को वोकल” बनाने पर जोर

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प्रधानमंत्री मोदी जी ने कोरोना संकट से जूझ रहे भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए देश को प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया है। इसके लिए उन्होंने तमाम देशवासियों से ना केवल स्वदेशी अपनाने पर बल दिया है बल्कि “लोकल को वोकल” बनाने का नारा भी दिया है। इससे ना केवल देश आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि देश में तमाम रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे और बेरोज़गारी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

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मैं पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं, हालांकि मशीनें मुझे उतनी उत्साहित नहीं करती, जितना कि शब्द करते हैं। मुझे लिखना बहुत पसंद है और विभिन्न स्रोतों से मैं लिखने का अभ्यास करता रहता हूं। कुछ समय से मैने इंटरनेट पर अपना योगदान देना शुरू किया है। मैं अंग्रेजी में कुछ अन्य ब्लॉग भी चला रहा हूं। मुझे इस बात की आवश्यकता महसूस हुई कि हिंदी में एक अच्छी वेबसाइट होनी चाहिए जो हिंदी पढ़ने वाले समुदाय को उपयोगी सामग्री प्रदान कर सके। इसलिए, यह ब्लॉग मुख्य रूप से केवल हिंदी पाठकों के लिए केंद्रित है और हर शब्द विशुद्ध रूप से देवनागरी लिपि में लिखा गया है।

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